वैत्रदक और सनातन धमष में गौशाला का अत्यंत महत्व बताया गया
है।
आयोजन के अंतगषत में साता के पश्चात् ग्रामीणों ने गौशाला का
संचालन संभाला है।
पस्तक "पद्म पराण" में त्रलखा गया है त्रक गौशाला में सौ से अत्रधक
गौमाताएं धूप-छााँव दोनों जगह गोपालन करती हैं ।
इसमें गौमाताओं के त्रनयत्रमत रूप से "खराक" का ध्यान त्रदया जाता
है।
गौमाताओं के त्रलए त्रनयत्रमत यािा-खाना कर उनका भोग तय कर
तेल समत्रपषत त्रकया जाता है ।
त्रजस कारण से गौमाताओं के स्वास्थ्य के प्रत्रत त्रवशेर् ध्यान त्रदया
जाता है।यहााँ प्रत्येक व्यस्थक्त - अत्रगत्रन, क्या त्रछपा मेरा" शब्द त्रनरं तर गाते हुए
गौशाला की प्रदत्रक्षणा करता है।यहााँ के नीचे की ओर आते ही गायों ही गायों का दृश्य और सेवा का
अद् भत दृश्य त्रदखाई दे ता है ।
गौमाताओं से प्रेम करने वाले प्रत्येक व्यस्थक्त के त्रलए गौशाला िल
पर प्रत्रतत्रदन खास के रूप में प्रत्रसद्ध गोपाल स्वयं उपस्थित होते हैं ।
यहााँ पर पस्थित परुर्ोत्तम गोपाल के त्रनदे शन में गौमाता सेवा की
त्रनयत्रमत व्यविा होती है ।
संिापक डॉ. सरे श दशोरा के सात्रिध्य में मंत्रदर पररसर में गौशाला
के दशषन हे त त्रवशेर् दृत्रि जाती है।गौशाला एवं नारायण सेवा में आप भी अपना सहयोग प्रदान कर
सकते हैं।म ॅॅं लोढीखण्ड दे र्ी आपकी मनोक मन पूिव करें ।
माँ पांढरीपाठ देवी मंदिर
Contact: +91 7692006414